Solar लगाने वालों के लिए बड़ा अपडेट! MERC ने तय किया ₹2.82/kWh का नया रेट, जानिए क्या बदलेगा

भारत में सोलर एनर्जी को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है और हर साल सरकारें नई नीतियां और नियम लेकर आती रहती हैं। अब इसी कड़ी में महाराष्ट्र में सोलर लगाने वाले लोगों के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है। महाराष्ट्र इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन यानी Maharashtra Electricity Regulatory Commission (MERC) ने एक नया ड्राफ्ट जारी किया है जिसमें रूफटॉप सोलर से ग्रिड में भेजी जाने वाली अतिरिक्त बिजली के लिए नया टैरिफ प्रस्तावित किया गया है।

MERC fixed the new rate at 2.82kWh

इस ड्राफ्ट के अनुसार अब रूफटॉप सोलर सिस्टम से ग्रिड में एक्सपोर्ट की गई अतिरिक्त बिजली के लिए ₹2.82 प्रति यूनिट का रेट तय किया गया है। यह प्रस्ताव आने वाले वित्त वर्ष 2026–27 के लिए रेगुलेटरी ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से जारी किया गया है और इसके लागू होने की संभावित तारीख 1 अप्रैल 2026 मानी जा रही है।

रूफटॉप सोलर से एक्सपोर्ट बिजली पर ₹2.82 प्रति यूनिट का प्रस्ताव

MERC के ड्राफ्ट के अनुसार रूफटॉप सोलर पीवी सिस्टम से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली, जो नेट-मीटरिंग या नेट-बिलिंग के माध्यम से ग्रिड में जाती है, उसके लिए ₹2.82 प्रति यूनिट का जेनेरिक टैरिफ प्रस्तावित किया गया है। आयोग ने इस रेट को Mukhyamantri Saur Krishi Vahini Yojana 2.0 के तहत खोजे गए सबसे कम टैरिफ से जोड़ा है। इस योजना में सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए बोली ₹2.82 से ₹3.10 प्रति यूनिट के बीच लगी थी, इसलिए नियामक ने उसी के आधार पर यह न्यूनतम बाजार दर तय की है।

आयोग का मानना है कि रूफटॉप सोलर सिस्टम का मुख्य उद्देश्य घर या संस्थान की खुद की बिजली जरूरतों को पूरा करना होता है। इसलिए यदि अतिरिक्त बिजली ग्रिड में जाती है तो उसका भुगतान बाजार में उपलब्ध प्रतिस्पर्धी दरों के अनुसार होना चाहिए, न कि अधिक सब्सिडी वाले टैरिफ पर।

सोलर सेक्टर में टैरिफ तय करने का तरीका बदल रहा है

MERC ने अपने ड्राफ्ट में यह भी साफ किया है कि भविष्य में अधिकांश रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के टैरिफ प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया से ही तय होंगे। इसका मतलब यह है कि बड़े सोलर प्लांट, विंड प्रोजेक्ट, हाइब्रिड रिन्यूएबल प्रोजेक्ट या नए बायोमास प्लांट के लिए सरकार सीधे टैरिफ तय नहीं करेगी, बल्कि कंपनियों के बीच बोली लगाकर कीमत तय होगी। इसी कारण अब जेनेरिक टैरिफ तय करने की जरूरत धीरे-धीरे कम होती जा रही है। फिलहाल यह व्यवस्था मुख्य रूप से रूफटॉप सोलर से आने वाली अतिरिक्त बिजली और पुराने बायोमास प्लांट्स के लिए ही सीमित होती जा रही है। इस नई व्यवस्था से सोलर सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ने और बिजली की कीमतों को बाजार के अनुसार रखने में मदद मिल सकती है।

सोलर लगाने वाले लोगों पर क्या असर पड़ेगा

अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप में लागू हो जाता है तो महाराष्ट्र में सोलर लगाने वाले उपभोक्ताओं को यह समझना होगा कि सोलर सिस्टम लगाने का सबसे बड़ा फायदा खुद की बिजली बचत में ही रहेगा। यानी यदि आप अपने घर या फैक्ट्री में सोलर सिस्टम लगाते हैं और उससे बनी बिजली का अधिकतर हिस्सा खुद इस्तेमाल करते हैं तो आपकी बिजली बिल में अच्छी बचत होगी। लेकिन यदि सिस्टम ज्यादा बिजली बनाता है और वह ग्रिड में जाती है तो उस अतिरिक्त बिजली के लिए ₹2.82 प्रति यूनिट का भुगतान मिलेगा। हालांकि इस बिजली को डिस्कॉम खरीदेंगे और इसे अपने सोलर रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन यानी Solar RPO लक्ष्य को पूरा करने में भी उपयोग कर सकेंगे।

MERC ने इस ड्राफ्ट पर सभी स्टेकहोल्डर्स से सुझाव और आपत्तियां भी मांगी हैं। इसमें सोलर डेवलपर्स, डिस्कॉम कंपनियां, उपभोक्ता संगठन और Maharashtra Energy Development Agency जैसी एजेंसियां शामिल हैं। आयोग ने सुझाव देने की अंतिम तारीख 20 मार्च तय की है। इन सभी सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम टैरिफ ऑर्डर जारी किया जाएगा और संभावना है कि नए रेट 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएंगे।

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